मालाबारी शहतूत के फायदे

- मालाबारी शहतूत की खेती करने के लिए, आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना होगा:
मालाबारी शहतूत के बोने का तरीका:
1. मिट्टी का चयन: शहतूत की खेती के लिए दोमट से लेकर चिकनी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है, जिसका पीएच मान 6.2 से 6.8 होना चाहिए।
2. कटिंग तैयार करना: 8-10 महीने पुरानी शाखाओं को 22-25 सेमी लंबे डंडों में काट लें, जिनमें 5-6 कलियाँ हों।
3. रोपण: कटिंग को जूट के गीले कपड़े में लपेटकर छाया में रखें, फिर 60 सेमी गहरे गड्ढे खोदकर मिट्टी और गोबर की खाद के मिश्रण से भरें।
4. सिंचाई: शहतूत के पौधों को नियमित रूप से पानी दें, लेकिन जलभराव न होने दें ।
मालाबारी शहतूत के फायदे:
1. पोषक तत्व: शहतूत में विटामिन सी, विटामिन के, और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं।
2. रोग प्रतिरोधक: शहतूत का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
3. पाचन: शहतूत पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
शहतूत के संरक्षण का तरीका:
1. मल्चिंग: शहतूत के पेड़ों के आधार के चारों ओर लकड़ी के चिप्स, छाल या पुआल जैसी जैविक सामग्री की एक परत लगाएं।
2. सिंचाई: शहतूत के पौधों को नियमित रूप से पानी दें, लेकिन जलभराव न होने दें।
3. कीट नियंत्रण: शहतूत के पौधों पर कीटों का नियंत्रण करने के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग करें ⁴।
कटिंग से पौधे तैयार करना:-
कटिंग: 8-10 महीने पुरानी शाखाओं को 22-25 सेमी लंबे डंडों में काट दिया जाता है, जिनमें से प्रत्येक में 5-6 कलियाँ होती हैं।
कटिंग रोपण: कटिंग को नर्सरी में या सीधे खेत में रोप दिया जाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि एक कली खुली रहे।
पौधे: पौधों को सीधे खेत में लगाया जा सकता है, प्रत्येक गड्ढे में एक पौधा लगाया जा सकता है।
नर्सरी प्रबंधन: बीज प्रवर्धन की तरह, उचित सिंचाई और अन्य प्रबंधन विधियों की आवश्यकता होती है।
रोपण: शहतूत (Mulberry) के पौधों को कुछ महीनों के बाद मुख्य खेत में रोपा जा सकता है।
शहतूत के लिए पौधारोपण की विधि (Planting method for mulberry)
शहतूत की बागवानी में भूमि तैयार करना, रोपण सामग्री (कटिंग या पौधे) का चयन करना और उन्हें उचित दूरी और गहराई पर रोपना शामिल है। रोपण प्रक्रिया में गड्ढे या खाइयाँ बनाना, रोपण सामग्री बिछाना और मिट्टी को मजबूत करना शामिल है। रोपण के बाद की देखभाल में मल्चिंग, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण शामिल है। शहतूत (Mulberry) की बागवानी के लिए पौधारोपण की विधि इस प्रकार है, जैसे-
गड्ढे: गड्ढे (60 सेमी गहरे) खोदें और उन्हें मिट्टी और गोबर की खाद के मिश्रण से भरें।
खाई: कुछ मामलों में, खाई विधि का उपयोग किया जाता है, जहाँ सिंचाई के लिए खेत में मेड़ और खाइयाँ बनाई जाती हैं।
अंतराल: पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें (उदाहरण के लिए, 90 सेमी x 90 सेमी या 2’x2′, 2’x3′, 3’x3′, प्रणाली के आधार पर)।
रोपण गहराई: कटिंग या पौधे को सही गहराई पर रोपें, यह सुनिश्चित करते हुए कि कटिंग का उपयोग करने पर कटिंग की ऊपरी कली बाहर निकली रहे।
जल-आपूर्ति और परिशोधन
त्रिकोणीय व्यवस्था: कटिंग के लिए, प्रति गड्ढे 3 कटिंग, 15 सेमी की दूरी पर, त्रिकोणीय व्यवस्था की सिफारिश की जाती है।




