टेक्नोलॉजी

अपनी बिजली के बिल में तीन तरीके से आप कटौती ला सकते हैं

अपनी बिजली के बिल में तीन तरीके से आप कटौती ला सकते हैं

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आप बिजली की कमर्शियल उपभोक्ता है और बिजली आपकी उद्योग व्यापार प्रतिष्ठान की लिए सबसे आवश्यक वस्तु है तो आप अपने भारी भरकम बिजली की बिल ऊंचे इन तीन उपायों से कम  कर सकते हैं:

1. पहला स्वयं की छत पर रूफटॉप लगाकर

2. दूसरा अगर आप सोलर सिस्टम लगाने की लिए capex माडल भारी भरकम निवेश और बैंक की आसान सुविधा का लाभ नहीं लेना चाहते तो थर्ड पार्टी के द्वारा Opex /Resco मॉडल बिना निवेश किए ही उनसे अपने छत पर उस मॉडल के द्वारा सोलर पैनल लगवा कर 5 साल के बाद स्वयं उसका मालिकाना हक मुफ्त में पा सकते हैं ।

3.तीसरा सस्ती बिजली Open excess के द्वारा किसी भी सोलर पार्क से उत्पादित की गई बिजली का उपयोग करके अपने बिलों में कमी ला सकते है।

ज्यादा जानकारी हेतु कॉल कर सकते हैं ज्वाइन श्री पावर सोशल रिन्यूएबल समिति JSPSRS जेएसपीएसआरएस द्वारा इस संबंध में आपको विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी।

Potential solar

 

क्या आप जानते हैं ?

 

सोलर रूफटॉप को स्थापित करने में भारत का सबसे अग्रणी प्रदेश गुजरात बनकर उभर रहा है जहां अभी तक केवल 84 परसेंट उपलब्धि पूरे देश के टारगेट का उसे प्राप्त हो चुका है।

गुजरात ने न केवल भारत का पहला सौर ऊर्जा संचालित गांव बनाने का बीड़ा उठाया है, बल्कि एक बिजनेस स्टैंडर्ड विश्लेषण से पता चलता है कि राज्य आवासीय भवनों के लिए रूफटॉप सौर क्षमता स्थापित करने में भी देश का नेतृत्व करता है।

डेटा से पता चलता है कि सरकार के रूफटॉप सोलर प्रोग्राम फेज II के तहत आवासीय भवनों के लिए देश के कुल रूफटॉप इंस्टॉलेशन में राज्य का 84 प्रतिशत हिस्सा है। यह कार्यक्रम ग्रामीण परिवारों सहित आवासीय क्षेत्रों में केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) के माध्यम से 4000 मेगावॉट रूफटॉप सोलर (आरटीएस) की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। कार्यक्रम के लिए दिशानिर्देश अगस्त 2019 में जारी किए गए थे। कार्यक्रम को 6 अक्टूबर को 2026 तक बढ़ा दिया गया था। वहीं दूसरी ओर अन्य प्रदेश के लोग इस मामले में बहुत पीछे हैं।

Soalr
Solar

 

देश भर में आवासीय भवनों पर स्थापित 1,385 मेगावॉट की रूफटॉप सौर क्षमता में से, गुजरात ने 1,167 मेगावॉट स्थापित किया था। देश के अन्य राज्यों में इस ओर किसी प्रकार की हुई उत्सुकता या रूपरेखा टारगेट बतौर नहीं तय की गई है।

इस सप्ताह की शुरुआत में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मोढेरा को देश का पहला चौबीसों घंटे सौर ऊर्जा से चलने वाला गांव घोषित किया था। मोढेरा अब देश का सबसे पहला गांव होने का गौरव प्राप्त कर चुका है जो अब केबीसी जैसे कंप्यूटर टीवी एग्जाम का भी एक उत्तर होगा।

देश के बाकी हिस्सों का ट्रैक रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है। जून तक लक्ष्य का केवल 34.6 प्रतिशत ही पूरा हुआ था। इस निराशाजनक परिणाम के कारण है तो वह है शासन के द्वारा दिया जाने वाला भ्रामक सब्सिडी जिसके चक्कर में हर उपभोक्ता इस बात को लेकर परेशान हो जाता है कि हड़बड़ी में कहीं वह ठगा न दिया हो इसलिए वह सभी इंस्टालर को शक की नजर से देखता है कि वह उसे उचित रेट नहीं बता रहे हैं।

Discom target

गुजरात के अलावा, किसी अन्य राज्य ने 50 मेगावॉट से अधिक की क्षमता स्थापित नहीं की है। केरल में 30 जून तक 39.6 मेगावॉट की स्थापित क्षमता थी, उसके बाद राजस्थान में 36.5 मेगावॉट की क्षमता थी। इस प्रतिस्पर्धा में मध्य प्रदेश का स्थान अभी बहुत दूर है अतः इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश के डिस्कॉम की सारी कंपनियां अब कमर कस रही है। जैसे कि अभी इस वर्ष 18000 किलो वाट की क्षमता को प्राप्त करने के लिए पूर्वी क्षेत्र डिस्काउंट कंपनी ने निर्णय लिया है।

 

Solar rooftop
Solar rooftop

 

विभागीय स्थायी समिति द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में, मंत्रालय ने संकेत दिया कि सरकार के 40Gw के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 5.87 Gw सोलर रूफटॉप क्षमता स्थापित की गई है। इस लक्ष्य को 2030 तक 500गीगावाट किया गया है जिसे पाने में मशक्कत करना पड़ रहा है। अगर इसी मंथर गति से कार्य होता रहा तो यह कार्य 2035 तक भी पूरा होना संभव नहीं दिखता।

आगे के विश्लेषण से पता चलता है कि रूफटॉप सोलर प्रोग्राम फेज II के तहत राज्य वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को आवंटित परियोजनाओं में गुजरात का हिस्सा 43.4 प्रतिशत है, जिसमें महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 14.2 प्रतिशत है। किसी अन्य राज्य के पास आवंटन में दो अंकों की हिस्सेदारी नहीं थी।

रूफटॉप सोलर योजना के अलावा, समग्र सौर लक्ष्यों में सरकार का प्रदर्शन पिछड़ रहा है। पिछले पांच वर्षों में वास्तविक व्यय लगातार बजटीय लक्ष्य से कम रहा है। सौर योजनाओं के लिए आवंटित राशि का आधा ही उपयोग किया गया है। आवश्यकता है इस कार्य के लिए नवकरनिय ऊर्जा वाले विभाग को विशेष लक्ष्य देकर कार्य पूरा कराया जाए।

नतीजतन, क्षमता वृद्धि भी सरकारी लक्ष्यों से पीछे रह गई है। 2017-18 और 2021-22 के बीच सरकार द्वारा लक्षित 44.5 Gw क्षमता में से केवल 63 प्रतिशत ही सरकार द्वारा स्थापित किया गया था।

Charging station

सरकार ने 2023 तक सौर क्षमता स्थापना के अपने 130Gw लक्ष्य का आधा हासिल कर लिया था। शेष 50% लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभी और एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा।

अब इसका 2030 तक 500Gw सौर क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है। अगर इस कार्य के लिए गैर सरकारी संस्थाओं और कई जागरूक संस्थाओं को कार्य में लगाया जाए तो उन्हें अच्छी उपलब्धि मिल सकती है।


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