विद्युत कर्मचारियों की स्ट्राइक लगातार चौथा दिन

t4unews:विद्युत संविदा कर्मचारियों और आउट सोर्स विद्युत कर्मचारियों की स्ट्राइक किया लगातार चौथा दिन  है। जिसमें लोग अपने पहुंच सूत्रीय मांग और भविष्य की स्थायित्व की तथा विद्युत कंपनी के उन्नत तरीके से कार्य करने की परंपरा को बनाए रखने के लिए अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रशासन इस ओर क्या सोचता है क्या उसकी दिमाग में खिचड़ी पक रही है और आने वाले समय में वह क्या करेगा यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।

 किंतु एकता में बल होती है अपनी मांगों को कई वर्षों तक अहिंसात्मक पूर्वक, अनुरोध पूर्वक और विनय पूर्वक रखने के बाद भी यदि प्रशासन इस विषय पर गंभीर नहीं हो रही है या उचित जवाब निर्णय नहीं दे रही है तो इस संबंध में एक संशय की स्थिति उत्पन्न होती है कि हर बार केवल टरका  देने से या परिस्थितियों को आगे के लिए टाल देने से बात नहीं बनती है ।
अभी नहीं तो कभी नहीं .....
इस बात के लिए अब कर्मचारी अधिकारी और विद्युत कंपनी की सभी वर्ग एक साथ हो गए हैं। इस बार लोगों को अपना सर्वस्व लगा देने का जुनून सवार हो गया है इस संबंध में आपकी अपनी क्या राय हो सकती है यह रेफरेंडम द्वारा तैयार किया जा रहा है यह जनमत के द्वारा तैयार किया जा रहा है कि हर व्यक्ति ,हर एक सदस्य क्या सोचता है इस संबंध में ?
आइए भाग लें और अपने धारणाओं से अवगत कराएं..

यदि आपका कोई विशेष सलाह हो तो लिखें...

 आपका मन क्या कहता है स्ट्राइक के बारे में बताइए

विद्युत कर्मचारियों की स्ट्राइक  लगातार चौथा दिन
employee on strike in MPEB

1. अगर देश में नौकरी नहीं है तो फिर इतनी खर्चीली पढ़ाई के बदले सरकार को क्या करना चाहिए ?


what to do after education ,only startup,business, employment?

अगर देश में नौकरी नहीं है तो फिर इतनी खर्चीली पढ़ाई के बदले सरकार को क्या करना चाहिए ?
पकोड़े बेचने के लिए फंडिंग
 चाय बेचने के लिए फंडिंग
 लोगों को बेरोजगारी भत्ता देना चाहिए
देश के सभी शिक्षण संस्थान निशुल्क कर देनी चाहिए

2. क्यों हर बार करोड़ों रोजगार लोगों को देने की बात कहकर इस देश के नेता बदल जाते हैं?

मामा अपनी बातों पर अडिग क्यों नहीं है ,कैसे देंगे नए लोगों को रोजगार जब पुराने लोगों का ही ठिकाना नहीं है?

क्यों हर बार करोड़ों रोजगार लोगों को देने की बात कहकर इस देश के नेता बदल जाते हैं?
राजनीति का काम केवल लोगों को उल्लू बनाना होता है
चाहे कोई भी पार्टी आ जाए सब झूठे आश्वासन देती है
अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता
 फिर 5 साल बाद मिलेंगे

3. क्या सभी संविदा कर्मी जिन्हें कभी रेगुलर नहीं किए जाने का लिखित अनुबंध कराया गया है प्रशासन कभी नियमित करेगी?

जब देश के नेता गण अपने स्वयं के स्वार्थ के लिए नियम बदल सकते हैं तो क्या रोजगार  नौजवानों की जीवन को बनाने के लिए और देश को सजाने संवारने के लिए नया विधि का विधान नहीं बना सकते?

 

क्या सभी संविदा कर्मी जिन्हें कभी रेगुलर नहीं किए जाने का लिखित अनुबंध कराया गया है प्रशासन कभी नियमित करेगी?
 राजनीतिक स्वार्थ के लिए सब संभव है
आर्थिक रूप से यह असंभव है 
यदि एकता में यह प्रयास किया जाए तो संभव है
 कुछ कहा नहीं जा सकता


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