जय गढ़ा की महाकाली कलकत्ते वाली तेरा वचन न जाए खाली

गढ़ा फाटक के पड़ाव में स्थापित महाकाली mahakali प्रतिमा जिन्हें संस्कारधानी  sanskardhani वासी जबलपुर की महारानी के नाम से जानते हैं वहां लोगों की अटूट आस्था जुड़ी हुई है। पंडाल में स्थापित बृहद महाकाली के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट और रोग दूर होते हैं। वहीं मां की प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार मां की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हुए है।

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t4unews:-प्रतिवर्ष मां के भक्तों को इस दिन का इंतजार होता है कि कब माता से मिलन होगा भक्त मां काली के जाज्वल्यमान स्वरूप को निहारने के लिए आतुर रहते हैं जबलपुर jabalpur का गड़ा फाटक के पास मां काली की विशाल मूर्ति स्थापना से लेकर विसर्जन तक आकर्षण का केंद्र बनती है सभी श्रद्धालु और देवी भक्त माता के इस विकराल स्वरूप को ममतामई रूप में देखने के लिए प्रतिवर्ष यहां आते हैं।

गढ़ा फाटक के पड़ाव में स्थापित महाकाली mahakali प्रतिमा जिन्हें संस्कारधानी  sanskardhani वासी जबलपुर की महारानी के नाम से जानते हैं वहां लोगों की अटूट आस्था जुड़ी हुई है। पंडाल में स्थापित बृहद महाकाली के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट और रोग दूर होते हैं। वहीं मां की प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार मां की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हुए है। बताया गया है कि सच्ची भक्ति करने वाले भक्तों से मां प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। मनोकामनाएं पूर्ण होने पर चमत्कारी नारियल उन्हें प्रसाद के रूप में दिया जाता है। नवीन महाकाली समिति के सदस्य ने बताया कि नवरात्र के दौरान यहां 13 से 15 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जहां भक्त आकर मां के दर्शन करते हैं। पंडाल में विराजमान जबलपुर की महारानी की खासियत यह है कि यहां मुंबई और नागपुर से श्रद्धालु मां के दर्शन करने के लिए आते हैं। मान्यता है कि मन्नत वाली मां महाकाली अपनी अनेकों विशेषताओं और चमत्कारों के लिए जानी जाती है। वहीं मां जब सच्ची भक्ति करने वाले भक्तों से प्रसन्न होती हैं तो उसकी सभी मनोकामनाएं तो पूरी करती ही है इसके साथ साथ उनके सभी कष्टों को भी हर लेती हैं।



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