वो चार लोग क्या कहेंगे? क्या-क्या हम सुनेंगे?

दहेज कोई देता है तभी कोई लेता है 

 यही सुन-सुनकर यही सोच सोचकर हम एक अपराध के बाद और कई अपराध किये जाते हैं ।क्या जरुरत है इतने पैसे खर्च करने की?
 जितना हिसाब लिखा है  आपका लगभग 20 लाख के  आसपास तो बैठता ही होगा ।इतना रुपया खर्च करने के बाद अगर कोई सौदा ले रहा है जाहिर सी बात है वारंटी गारंटी अच्छी होगी ।

t4unews: वो चार लोग क्या कहेंगे? क्या-क्या हम सुनेंगे? कैसे समाज में रहेंगे?अपनी बाकी बचे बेटियों  को कैसे ब्याहेंगे?

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अब देखो ना अमुक यादव जी ,शर्मा जी की एक ही तो ladali लाडली बेटी चाहिए थी ।जिसके लिए बचपन से लाडली लक्ष्मी योजना के तहत शासन ने पैसे जमा करवाएं ।माता पिता ने अपने खर्च से विशेष रुप से छुपा छुपा कर कुछ लाखों रुपए की एफडी भी कराई ।वह इसलिए किस समय पड़ने पर सही रिश्ता आने पर हम आश्चर्य से भर देंगे लाडली और उसके होने वाले संबंध को । पर हमारी अपेक्षा से कहीं ज्यादा बड़ा मुंह खुला हुआ देखा। उन्हें तो छोड़ो स्वयं लाडली भी एक कदम आगे निकली कि उनकी शादी में जैसा उनके कजिन की शादी में हुआ था उससे एक हाथ आगे कहीं हो। अब झेलो ,बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से पाए?

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दहेज कोई देता है तभी कोई लेता है 

 यही सुन-सुनकर यही सोच सोचकर हम एक अपराध के बाद और कई अपराध किये जाते हैं ।क्या जरुरत है इतने पैसे खर्च करने की?
 जितना हिसाब लिखा है  आपका लगभग 20 लाख के  आसपास तो बैठता ही होगा ।इतना रुपया खर्च करने के बाद अगर कोई सौदा ले रहा है जाहिर सी बात है वारंटी गारंटी अच्छी होगी ।इसका पूरा दोष लड़की पक्ष के ऊपर जाता है । अपनी फूल सी लाडली के पूरे ऐशो आराम के लिए गजब का रिश्ता चुना जाता है ।जो सांस लेने से लेकर श्वास को छोड़ने तक का पूरा ऐसी सुविधा  प्रदान करें चाहे जिसके लिए लड़की के पिता को अपने शरीर का कतरा कतरा भी क्यों ना बेंचना पडे ?
अगर इतना सब कुछ करने के बाद भी खरीदा गया ढूंढा गया दूल्हा (groom )चाइनीज आइटम निकला तब क्या होगा यह तो सभी  आशंकित रहते है। क्या सभ्य समाज और संभ्रांत लोगों को इस बात पर विचार नहीं करना चाहिए कि इतने व्यर्थ के खर्च से तो एक उद्योग खडा हो जाता है जो इस बेरोजगारी (unemployment) के समय में कई लोगों के लिए जीवन को चलाने लायक बना सकता है। परंतु सबको सरकारी government नौकर चाहिए सबको  छ: अंकों की वाला आमदनी पाने वाला रिश्ता चाहिए ।महत्वकांक्षा और दिखावा जब तक सर चलकर बोलेगा  तब तक ऐसा ही होता  रहेगा।


नखरेवाली भोली भाली के सिद्धांत भी अजब


शादी के बाद भी लाडली की तेवर राजकुमारियों से कम नहीं होते ।हर बात पर उलाहना होता है कि इतने खर्च तो हम अपने नौकर पर कर देते थे ,जितने कि आप हम पर एहसान कर रहे हैं ।और शुरू हो जाता है शीत युद्ध से ग्रीष्म युद्ध तक बातें ।क्या हम अपने बच्चों को यह शिक्षा नहीं दे सकते की बर्बादी तो बर्बादी है चाहे किसी भी पक्ष की हो ? इस प्रकार के अपव्यय से, दिखावे से कोई आपका आर्थिक स्थिति या सम्मान नहीं बढ़ता है। सब जानते हैं मगर मजबूर हैं की ........
लोग क्या कहेंगे ,हम किस किस किस को चुप रहने कहेंगे?


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