There is a difference in getting noticed and being remembered ..self healing

जीवन में अगर हमें प्राथमिकता नहीं मिलती है या हमें किसी का ध्यान नहीं मिलता या नजर नहीं मिलती तो हम अपने आप को निर्धारित, तुच्छ समझने लगते हैं ।यही कारण है कि जब कोई वार्तालाप करता है चाहे दो लोग हो या चार लोग हैं या एक बहुत बड़ा वृंद या समुदाय में लोग इकट्ठे हो। सभी चाहते है कि लोग उसकी बात को खासतौर पर सुने और यह एक सभ्य समाज का अंग भी है एक साथ सभी लोग बोलने चिल्लाने कहने लगे तो वह विचार नहीं एक कोलाहल कहलायेगा और कोलाहल में लोगों की आवाजें एक दूसरे से मिलकर दब जाती हैं। जैसे हमारी लोकसभा और राज्यसभा में हमारे द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के बीच तीखी नोकझोंक चिल्ला चोट और कई प्रकार के शोर-शराबे प्रथा मारपीट जैसी घटनाएं होती हैं। वह एक असभ्य समाज का अंग हो जाता है।उसका कोई सार तत्व नहीं निकल पाता ।यह अभिव्यक्ति जिसकी बहुत जोर की हो या ज्यादा वेदना की हो और सब का ध्यान वह बरबस अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी जब मन की बात कहते हैं तब उनके द्वारा कही जाने वाली बातें केवल एक तरफा होती है और वह भी ध्यान से सुनना पड़ता है क्योंकि हम रेडियो से उनके उद्गार सुनते रहते हैं जिसमें हमें कहने के लिए कुछ नहीं शेष रह जाता केवल सुनना ही रह जाता है। इस प्रकार एक तरफा किए गए वार्तालाप से अगर कोई चीज सामने उभरती है तो वह है प्राथमिकता मिलना।अगर हम सुनने के लिए शांति बनाकर नहीं रखेंगे तो ऐसे में हमें क्या समझ में आएगा ।  There is a difference in getting noticed and being remembered ..self healing यूट्यूब में इस वीडियो को देखें विचार अभिव्यक्ति की प्रस्तुतकर्ता सुश्री प्रिया मुले ने इस वीडियो में यह बताने का प्रयास किया है कि हम अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए अपना ध्यान लोगों तक आकृष्ट करने के लिए माहौल में एक जबरिया प्रयास में स्थापित  नहीं करें ।अगर हम शांतिपूर्ण ढंग से भी अगर हम किसी चीज को बताने का कोशिश करें तो वह भी लोगों के समझ में आती है और कर्म करना ही हमारा अधिकार रह जाता है फल या रायशुमारी देने की बात तो केवल सर्वशक्तिमान ईश्वर या सामने वाले व्यक्ति जिसके अंदर वह विराजमान होता है उसके द्वारा भी हमें मिल ही जाता है।

There is a difference in getting noticed and being remembered ..self healing
Priya Mule

1. सुश्री प्रिया सुले की उदगार को सुनने के बाद  आपको क्या लगता है कि वे क्या चाहती है?

हमें मौन रहना चाहिए
हमें मौन रहना चाहिए
हमें ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए कि लोग हमें नोटिस करें
हमें ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए कि लोग हमें नोटिस करें
 हमें जोर जोर से बोलना चाहिए
हमें जोर जोर से बोलना चाहिए
हमें केवल अपना काम करना चाहिए बाकी लोगों पर छोड़ देना चाहिए
हमें केवल अपना काम करना चाहिए बाकी लोगों पर छोड़ देना चाहिए

2. सुश्री प्रिया मुले के वक्तव्य से आप किस प्रकार की हिंदूग्रंथ के उपदेश से इसको संबंध कर सकते हैं ?

रामायण से
गीता से 
वेद से 
किसी से नहीं


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