आनसाइट एवं आफसाइट सोलर एनर्जी साल्युशन देने वाले  'माईसन प्लस'

गगन वरमानी ने एनआइटी कुरुक्षेत्र से बीटेक (मैकेनिकल) किया है। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान ही आटोमोटिव इंडस्ट्री में नौकरी मिल गई। वहां 12 साल विभिन्न पदों पर रहते हुए चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। 2006 में मोजरबियर ज्वाइन किया। सोलर बिजनेस का कोई अनुभव नहीं था। लेकिन संस्थापकों ने कंपनी के लिए सोलर डाउनस्ट्रीम बिजनेस स्थापित करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी।

आनसाइट एवं आफसाइट सोलर एनर्जी साल्युशन देने वाले  'माईसन प्लस'
आनसाइट एवं आफसाइट सोलर एनर्जी

t4unews:आनलाइन टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग साल्युशन एवं फाइनेंसिंग प्लेटफार्म ‘माईसन’ के संस्थापक एवं सीईओ गगन वरमानी ने सोलर यूटिलिटी प्रोडक्ट्स (रूफटाप पैनल्स) को देश के ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। वह लोगों की सोच में बदलाव लाना चाहते हैं, इसलिए सौर ऊर्जा उत्पादों के प्रति जागरूकता लाना इनके बिजनेस माडल का एक अहम हिस्सा है। आने वाले वर्षों में इनका लक्ष्य एक करोड़ घरों तक सोलर रूफटाप पहुंचाना है। हाल ही में कंपनी ने आनसाइट एवं आफसाइट सोलर एनर्जी साल्युशन देने वाले एक नया वर्टिकल 'माईसन प्लस' लांच किया है, जो रेस्को एवं बूट माडल के तहत सोलर पीवी प्रोजेक्ट्स विकसित करेगा। इनका लक्ष्य आने वाले तीन वर्षों में २०० मेगावाट की पाइपलाइन विकसित करना है। वरमानी के अनुसार, माईसन प्लस एक स्वतंत्र सब्सिडियरी के तौर पर काम करेगी, जिसके लिए 600 करोड़ रुपये निवेश करने का इरादा है।

गगन वरमानी ने एनआइटी कुरुक्षेत्र से बीटेक (मैकेनिकल) किया है। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान ही आटोमोटिव इंडस्ट्री में नौकरी मिल गई। वहां 12 साल विभिन्न पदों पर रहते हुए चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। 2006 में मोजरबियर ज्वाइन किया। सोलर बिजनेस का कोई अनुभव नहीं था। लेकिन संस्थापकों ने कंपनी के लिए सोलर डाउनस्ट्रीम बिजनेस स्थापित करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी। गगन बताते हैं, मैंने जोखिम लिया। थोड़ा डर भी था। लेकिन कुछ नया करने का उत्साह अधिक था। आखिर, एक पारिवारिक कारोबार में मुझे स्वतंत्र रूप से कारोबार करने का अवसर जो मिल रहा था। यहीं से एंटरप्रेन्योरशिप में पहला कदम रखा। इसके सकारात्मक नतीजे मिले। राजस्थान सरकार के सहयोग से पहली बार सोलर फार्म के कान्‍सेप्‍ट को भारत में क्रियान्वित किया गया।

सीखते हुए बढ़े आगे

गगन की मानें, तो शुरू के कुछ महीने सीखने में ही लग गए। मार्केट को जाना-समझा। स्ट्रेटेजी पर कार्य किया। जब आत्मविश्वास बढ़ा, तो 2010 में अपनी कंपनी सनबार्न एनर्जी की नींव रखी। इसमें भारत समेत अमेरिका के निवेशकों ने पूंजी लगाई। वह बताते हैं, हमने मार्केट रिसर्च भी जारी रखा। इसी दौरान सोलर प्रोडक्ट्स की जरूरत का पता चला। हमने देखा कि सभी कंपनियां बड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही हैं, जबकि आम कस्टमर्स को उनकी जरूरत का सोलर प्रोडक्ट नहीं मिल पा रहा। इसके बाद ही सितंबर 2015 में हमने एक नया स्टार्टअप ‘माईसन’ लांच कर दिया, जो लोगों की हर छोटी-बड़ी ऊर्जा जरूरत को पूरा करता है।
विजन पर था भरोसा

गगन मानते हैं कि सीख हमेशा विपरीत परिस्थितियों में ही मिलती है। 2006-07 के आसपास सोलर इंडस्ट्री उतनी विकसित नहीं थी। लोगों ने कई प्रकार की शंकाएं जताईं। ग्राहकों को आश्‍वस्‍त करना एक चुनौती रहा। आर्थिक मुश्किलें आईं। बैंक ऋण देने में दिलचस्पी नहीं लेते थे। लेकिन मैंने धैर्य बनाये रखा। साथ ही, अपने विजन पर विश्वास। हमने ग्राहकों की पहचान कर निवेशकों से बात की। उन्होंने 25 लाख डॉलर का निवेश किया। आनलाइन एवं आफलाइन अभियान, फोटो वाक के माध्यम से ग्राहकों को सोलर पावर पर भरोसा करने के लिए प्रेरित किया गया। बाजार में मांग बढ़ी और हमें अच्छे नतीजे मिलने लगे।


क्रेडिट जागरण

Solarpower

#onsite
#offsite
#misonsplus
#solarrooftop
#think4unitynews



Download smart Think4unity app