नर्मदा शुगर मिल साली चौका नरसिंहपुर में आत्मनिर्भरता ऊर्जा के क्षेत्र में रिन्यूएबल एनर्जी अच्छा विकल्प है।

t4unews: आत्मनिर्भर भारत के साथ-साथ अब आत्मनिर्भर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को प्रमोशन देने का समय आ चुका है। सरकारें तो बनती रहेंगी बदलती रहेंगी और नए सिरे से बनती रहेंगी मगर हम इस भारत के वासियों को यह बात अवश्य सोचना चाहिए कि यदि हम भारतवासी  एनर्जी की तरफ अपना रुख करें तो हमें कभी भी किसी दूसरी फॉसिल फ्यूल पैट्रोलियम शक्ति के ऊपर आत्म निर्भरता हमारी बढेगी और आत्मनिर्भरता के कारण हमारी राजस्व भी बचेगी। हम यदि सोलर पावर को उपयोग करते हुए सोलर पावर से बिजली बनाने का उपयोग करें  सोलर रूफटॉप के द्वारा बिजली बनाएं और साथ ही साथ कृषि उत्पादों से बायोमास के द्वारा यदि हम बिजली का उत्पादन करने में प्रकृति का बायोडिग्रेडेबल संबंध को स्थापित कर सके तो यह मानवता की जीत होगी और हमारा कुदरती बायोडिग्रेडेबल सिद्धांत बना रहेगा जो सदैव रोशन करती रहेगी आपके जीवन को जगमग रोशन करती हुए। यदि हम बात करें कि पावर जेनरेशन करने वाले शुगर मिलों की तो देश का पहला ऐसा शुगर मिल नर्मदा शुगर मिल जो साले चौका पोडार  स्थित नरसिंहपुर में स्थित है जो अपनी बिजली की उत्पादन करते हुए गन्ने के बगास यानी कि अंतिम बचे उस छिलके को जिस को भूसे के  रूप में कन्वर्ट करके पूरा रस चूस लिया जाता है और फिर जो सूखा भूसा बचता है उसे सुखाकर के बॉयलर में कोयले के साथ जलाकर उष्मीय ऊर्जा के रूप में उपयोग करते हुए बिजली बनाई जाती है ।बिजली बनाने का सिद्धांत उसी प्रकार होता है जैसे कि आम तापीय घरों में होता है यहां हम आपको बताना चाहेंगे कि नर्मदा शुगर मिल साले चौका स्थित जो विगत 25 वर्षों से इस दिशा में कार्यरत है और अपने अभिनव प्रयासों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा का उत्पादन कर रहा है। आज अपने इस चरण में 21 मेगावाट की बिजली सप्लाई करने वाला देश का पहला शुगर मिल चुका है जिसमें स्वयं के उपयोग के 7 मेगा वाट के साथ वह 21 मेगावाट की बिजली पावर को दिल्ली मेट्रो को बेचकर स्वयं को मालामाल भी कर रहा है और उनसे जुड़े हुए आसपास के सभी किसानों को ₹5 प्रति क्विंटल का बिजली बोनस गन्ना किसानों को दिया जा रहा है।आश्चर्य के साथ प्रसन्नता का विषय है कि इस प्रकार के उद्यमी हमारे देश में और हो जाएं तो रोने गाने के सिवाय और कुछ करने के बजाए अपने हर चीज को औद्योगिक क्रांति के साथ-साथ उद्यमिता में बदल दें ।इसके प्रबंध संचालक  श्री विनीत माहेश्वरी जी बहुत ही मिलनसार और सबको साथ लेकर चलने वाले व्यक्ति हैं ।उनके द्वारा विगत 25 वर्षों से जिस प्रकार किसानों की सोसाइटी बनाते हुए गन्ने का उत्पादन करने पर जोर साथ ही साथ मिल को सफलतापूर्वक चलाने का श्रेय प्राप्त किया हैं उनकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। उनके द्वारा निर्धारित किए गए  कार्यक्रम की ज्वाइन श्री पावर सोशल रिन्यूएबल सोसायटी इस प्रयास की तहे दिल से तारीफ करता है ।उनके द्वारा बनाई कई बिजली दिल्ली के एयरपोर्ट को भी बेची जा रही है इससे उन्हें इतना अच्छा आमदनी मिल रहा है जिससे देश के सभी उद्यमियों एवं किसानों को सीखना चाहिए किस प्रकार कृषि के बाय प्रोडक्ट को ऊर्जा में तब्दील कर सकते हैं। इसी क्रम में गाडरवारा में ओरियंट ग्रीन पावर जो कृषि उत्पाद जैसे सोयाबीन के खली खुशियों और उनके चरणों के द्वारा ऊर्जा के रूप में जलाने के बाद रिन्यूएबल एनर्जी के तहत बिजली की पैदावार करते हैं देश की समृद्धि में और पर्यावरण के व्यवस्थापन में सहयोग कर रहे हैं का क्रम आता है।कंपनी विगत 5 सालों से इस दिशा में कार्यरत है कि उन्हें क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा किसानों को कृषि के बाय प्रोडक्ट जैसे सोयाबीन के खरपतवार भूसी और बाघ के बच्चे पौधों की डंठल साथ-साथ गेहूं थी वह पराली भी मिले जिनको जला कर के वह ऊर्जा बना सकें । इस उष्मीय ऊर्जा से बॉयलर चलाते हुए बिजली का निर्माण कम से कम 11 मेगा वाट की क्षमता से करते हुए इस देश को प्रगति में योगदान दे सकें।पर्यावरण और प्रकृति को फॉसिल फ्यूल से बचाने के लिए यह भी एक अच्छा प्रयास है जिस दिशा में उनका कार्य अभी विचार हेतु प्रशासन के पास लंबित है उम्मीद है बहुत जल्द ही हम उन्हें इस प्रकृति को सजाने संवारने के लिए अच्छे स्वरूप में देखेंगे। इसी प्रकार के रिन्यूएबल एनर्जी बनाने के क्रम में जबलपुर के एमएसडब्ल्यू प्लांट जो भारत के कई जगह स्थापित है उनका भी नंबर आता है यह प्लांट शहर से निकलने वाले सभी प्रकार के जिले सूखे कचरो का निराकरण करने के बाद जलाने लायक सूखे कचरे को ईंधन के रूप में उपयोग करते हुए अपने बॉयलर के द्वारा 11 मेगावाट की बिजली उत्पन्न करते हैं ।जो सफलतापूर्वक जबलपुर के कठोदा स्थित प्लांट में यहां हमें देखने को मिल सकता है। सरकार इस मामले में गंभीर हो तो इस क्षेत्र में विस्तृत रोजगार के साथ-साथ लोगों को विशेष सुविधा भी प्रदान कर सकती है। जिसके माध्यम से वह अपनी जीडीपी में वृद्धि तो कर ही सकती है और साथ ही साथ आने वाले समय का लोगों को क्लीन पावर -ग्रीन पावर और पूरे पृथ्वी को साफ सुथरा रखने के विकल्पों पर भी जोर देते हुए कार्य कर सकती है।

नर्मदा शुगर मिल साली चौका नरसिंहपुर में आत्मनिर्भरता ऊर्जा के क्षेत्र में रिन्यूएबल एनर्जी अच्छा विकल्प है।
Renewable energy by GSPSRS

1. Quiz 1 -नर्मदा शुगर मिल के एमडी कौन है?

श्री रमेश माहेश्वरी
श्री रमेश माहेश्वरी
श्री विश्वजीत सरकार
श्री विश्वजीत सरकार
श्री विनीत माहेश्वरी
श्री विनीत माहेश्वरी
गजानन प्रसाद द्विवेदी
गजानन प्रसाद द्विवेदी

2. Quiz-2-ओरियंट ग्रीन पावर बायोमास कितने मेगा वाट का प्रोडक्शन करती है?

 

7 मेगा वाट
8 मेगा वाट
10 मेगा वाट
11 मेगा वाट


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