क्या चुनाव जीतने के लिए ईवीएम सचमुच में बहुत बड़ा दिव्यास्त्र है?

इस प्रतियोगिता में आप भाग लीजिए और नीचे दिए गए विकल्पों में से किसी एक विकल्प का नंबर की संख्या कमेंट बॉक्स में लिखिए और अपना नाम तथा व्हाट्सएप नंबर भी जरूर लिखें ताकि आपको विजेता होने पर इनाम भेजा जा सके यदि इसके अलावा आपके जेहन में कोई और भी अच्छी गुफ्तगू या वार्तालाप हो तो वह भी आप कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं।

क्या चुनाव जीतने के लिए ईवीएम सचमुच में बहुत बड़ा दिव्यास्त्र है?
Cartoon on present scene
t4unews:- सबसे बढ़िया गुफ्त गूं क्या हो सकती है इस व्यंग चित्र के लिए......
राजनीतिक पार्टियां अपनी आलोचना पर बहुत गंभीरता से विवेचना मंथन और चिंतन करती है किंतु किसानों का आंदोलन जो अपना 100 दिन अपनी पूरा कर चुका है और विश्व के इतिहास में भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में तानाशाही पूर्ण शासन होने की मिसाल कायम कर रहा है ।ऐसा रिकॉर्ड पूरे विश्व में ना अब कोई बना सकेगा ना बनेगा क्योंकि यह आंदोलन लगातार प्रगति पर है ।और अब करोना से भी ज्यादा  तीव्र गति से यह पूरे भारत में फैल रहा है ।क्या प्रशासन की विज्ञ जनों को इस बात का एहसास नहीं है कि वह अपनी हठधर्मिता और जीत से इस काले  इतिहास को रचने की ओर जा रहे हैं ।मौजूदा भाजपा सरकार का हश्र अब चुनाव के बाद चाहे जो हो लेकिन उन्होंने जन आंदोलन के रूप में प्रजातांत्रिक देशों में किए जा रहे इस प्रकार के भव्य जन आंदोलन कि एक ऐसा इतिहास लिख दिया है जो पूरे विश्व में भारत की छवि को शर्मसार करता है।

फिल्म आसपास का गाना जो 1981 में धर्मेंद्र ,हेमा मालिनी प्रेम चोपड़ा जैसे मशहूर हस्तियों के बीच फिल्माई गई थी। उसका गाना आज इतना प्रासंगिक है के प्रशासन के द्वारा लिए जा रहे हैं सभी निर्णय उसके ताबूत के अंतिम कील साबित हो रही है ।चारों तरफ विरोध ,विद्रोह और असंतोष का वातावरण है। प्रशासन इतनी सारी सर्जिकल स्ट्राइक का फार्मूला क्यों अपना रही है, या क्या उनकी मंशा है, क्या उनकी गणित है कि उनके द्वारा घोषणा पत्र में दिए गए मुंगेरीलाल के सभी सपने जो धरातल पर पूरा करने के लिए बहुत ही कठिन है ।यह इतना सरल नहीं है कि विपक्ष हाथ में हाथ धरे बैठ जाएगा और आप सबको मूकबधिर बनाकर करवा के जनता को करोना का मास्क मुंह पर लगवा कर मनचाहे निर्णय और अपने अनूठे प्रयोग से देश की जनता को हलकान कर स्वयं आनंद के साथ नहीं बैठ सकते ।यह तो दुनिया का उसूल है कि यदि आप किसी को परेशान करना चाहते हो तो आपको स्वयं 3 गुना पहले स्वयं परेशान होना पड़ेगा ।
जनता को हो रही तकलीफ और भविष्य में उनकी परिस्थितियों को भांपकर जिस प्रकार विद्यार्थी ,किसान और आम जनता लामबंद हो रहे हैं ,यह मौजूदा सरकार की लंबे भविष्य के अनुकूल नहीं लगती ।अभी तक भाजपा सरकार के प्रवक्ताओं का तर्क और तंज दोनों श्रवण और दर्शनीय होता था ,परंतु आजकल गोदी मीडिया के चैनल में जब भी यदा-कदा लोग उनके इंटरव्यू देख रहे हैं तो उनकी पेशानी पर बढ़ते हुए बल और उनके हारे हुए योद्धा की तरह लहूलुहान हो कर दिए जाने वाले व्यक्तव्य से यह स्पष्ट हो जाता है कि बीजेपी की नांव में भी अब कई छेद से युक्त हो चुकी है जो धीरे-धीरे आगामी चुनाव तक डूब सकती है।
 इतने विद्वान ,राष्ट्र प्रेमी और दूर की सोच रखने वाले मार्केटिंग गुरु लोगों का इस प्रकार उठने वाले बवंडर को नजरअंदाज करना उनकी ओवरकॉन्फिडेंस या फिर दिव्यास्त्र ईवीएम मशीन के कार्यप्रणाली पर अति विश्वास को दर्शाता है।
दर्शकों और विद्वानों से आग्रह है कि वह अपने कॉमेंट्स नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में बेहतरीन टाइटल क्या हो सकता है इस पर जरूर देवे।


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