खान सर पटना के द्वारा सरकारी तंत्र और कर्मचारियों पर उठाया गया प्रश्न सही नहीं है

मौजूदा परिपेक्ष में श्री खान सर पटना वाले जो मानचित्र कार के रूप में सबसे कम शुल्क पर विद्यार्थियों को सामान्य ज्ञान के साथ-साथ करंट अफेयर पर अच्छी कोचिंग देते हैं ।उनके द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर बनाया गया उनका यह वीडियो बहुत प्रासंगिक हो रहा है। इस संबंध में हमारे अनुभवी कर्मचारी श्री पंकज यादव द्वारा इस संबंध में सरकारी कर्मचारियों के फेवर में पक्ष में कुछ विचार प्रस्तुत किए गए हैं जो सुनने देखने और पढ़ने लायक हैं।

खान सर पटना के द्वारा सरकारी तंत्र और कर्मचारियों पर उठाया गया प्रश्न सही नहीं है
खान सर की शासकीय कर्मचारियों पर आरोप

t4unews: प्राइवेटाइजेशन के युग में यह बहस चलती रहती है की शासकीय कर्मचारी काम नहीं करते हैं और केवल ऊपरी कमाई घूंस(Bribe)के लिए ही लोगों को तंग करने का कार्य करते हैं। यह बात 5% यदि सही भी मान लिया जाए तो 95% लोगों की निष्ठा और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह उठाना अच्छी बात नहीं है। अपवाद जीवन में हर योनि में मिलेंगे परंतु इसका मतलब यह नहीं की पूरी संप्रदाय पूरी कम्युनिटी ही दागदार हैै,अविश्वसनीय है ।मौजूदा परिपेक्ष में श्री खान सर पटना वाले जो मानचित्र कार के रूप में सबसे कम शुल्क पर विद्यार्थियों को सामान्य ज्ञान के साथ-साथ करंट अफेयर पर अच्छी कोचिंग देते हैंं। उनके द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर बनाया गया उनका यह वीडियो बहुत प्रासंगिक हो रहा है ।इस संबंध में हमारे अनुभवी कर्मचारी पंकज यादव द्वारा इस संबंध में सरकारी कर्मचारियों के फेवर में पक्ष में कुछ विचार प्रस्तुत किए गए हैं जो सुनने देखने और पढ़ने लायक हैं।

Khan sir patna ka youtube me dekhne hetu click kare

क्या वजहे है जो सरकारी कर्मचारी को अक्षम प्रदर्शित करती है?


खान सर के द्वारा सरकारी तंत्र और कर्मचारियों पर जो प्रश्न उठाया गया है वह पूर्णता सही नहीं है। क्योंकि कई दशकों से चली आ रही सरकारी परंपरा की वजह से ही इस देश का निर्माण हुआ है।अब कंप्यूटरीकरण और नेटवर्क की मजबूत संरचना की वजह से अगर कोई पुरानी चीज नई की तुलना में कमजोर नजर आती है तो उसे पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। अगर गहराई से सोचा जाए तो यह दीमक भ्रष्टाचार का 1 दिन में पूरी फर्नीचर को नहीं खा सकता ।जब यह दीमक लगता है तब इसका इलाज नहीं करके नजरअंदाज कर छोड़ दिया जाता है ।या कह दिया जाए तो इसमें प्रशासन से लेकर नीचे तक बंदरबांट होता हैै। चूहे तक इस देश की समृद्धि को खा रहे हैं तो मैं तो एक इंसान हूं ।थोड़ा बहुत तो खा सकता हूंूं। यह दलील देकर संत्री्री, मंत्री्री, अधिकारी ,कर्मचारी सभी इस दौड़ में शामिल है तो क्या कहा जाए ।

जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।

अपना-अपना करो सुधार तभी मिटेगा भ्रष्टाचार 

Click this link to see full vedio .....खान सर के द्वारा सरकारी तंत्र और कर्मचारियों
अगर प्राइवेट संस्थान को देखा जाए तो वहां भी कोई कम भ्रष्टाचार नहीं है ।यह बात अलग है कि अभी वह सीधे पब्लिक के संपर्क में नहीं आए हैं ।उन्हें छोटे मोटे संस्थान मिले हैं परंतु जिन पब्लिक संस्थानों में प्राइवेट संस्था का बोलबाला हो चुका है वहां सेवाओं की कीमतें कई गुने बढकर के उपभोक्ताओ की जेब से काटी जाती है ।जैसे चिकित्सा की सुविधा ,स्कूलों की सुविधा ,यात्री गृह ,पार्किंग की सुविधा ,गाड़ी पार्किंग की सुविधा और भी ऐसी बहुत सारी सुविधाएं जिनको हम देखते हैं कि अगर आपके जेब में पैसे हैं तभी आप रोड में टोल टैक्स चुकाते हुए सही सलामत अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे ।


जैसी सेवा वैसी मेवा 


यह तो सभी जानते हैं परंतु भारत जैसे गरीब देश जो अभी पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुआ है ,वहां सरकार यानी माय बाप ।अगर जनता पर ,जनता को मिलने वाली सुविधा पर समुचित सब्सिडाइज रेट वाली सेवाएं नहीं दे तो गरीबों का तो जीना दूभर हो जाएगा ।रही बात सरकारी कर्मचारियों की तो उनके कार्यों में ,बनाए गए संविधान में ,आवश्यक शिथिलता और लक्ष्य प्राप्ति की योजनाओं से संबंधित कार्य योजना बनाकर भी उन से काम लिया जा सकता है ।केवल उनके बढ़ते हुए वेतन और सुविधाओं पर नजर लगाना ही उपाय नहीं है। उनकी जिम्मेदारी और कार्यशैली पर भी नजर घुमाना होगा और निकम्मे ,भ्रष्ट ,अक्षम लोगों को नियमानुसार पृथक भी करना आवश्यक होगा यदि हम देश का विकास चाहते हैं तो।

सभी जागरूक पाठकों दर्शकों और ज्ञानियों से निवेदन है कि
इस वीडियो में आदरणीय खान सर की व्यक्त्वयों पर विवेचना स्वरुप अपना मत दिया जाए।

(समाचार में प्रस्तुत वीडियो चित्र खान सर पटना के सौजन्य से प्राप्त हुए हैं)



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