गोबर की महिमा छत्तीसगढ़ सरकार ने खूब बढ़ाई

वैसे तो गांव-गांव सरकार लगभग 25 वर्षों से बायोगैस संयंत्र लगाने हेतु प्रोत्साहन छूट सब्सिडी इत्यादि का प्रावधान रखती हैं। गोधन को और गोवर्धन को ऊर्जा में बदलने के लिए बहुत प्रयास किए किंतु गलत तरीके से बनने वाले बायोगैस की टंकियां या डोम से किसानों को बहुत ज्यादा फायदा नहीं हुआ । अलाली के कारण भी किसान इस गोबर गैस के महत्वपूर्ण घटक मिथेन को ऊर्जा के रूप में दोहन नहीं कर सके ।

गोबर की महिमा छत्तीसगढ़ सरकार ने खूब बढ़ाई
गाय और गोबर

t4unews: अब गाय भैंस पालने और उनके रखरखाव करने तथा उनकी द्वारा दिए गए गोबर को सहेज कर रखना एक आय का स्रोत बन गया है ।अभी तक केवल यही कहा जाता था के अगर दूध पीना है तो गोबर की दुर्गंध को सूंघना ही पड़ेगा। इसी कारण लोग अपने मवेशियों को दूध देते तक बहुत प्रेम से पालते थे परंतु दूध छूटने के बाद वही मवेशी और उनके द्वारा किए जाने वाला गोबर भारी हो जाता था। लोगों को गाय भैंस के गोबर में बहुत दुर्गंध आती थी मक्खी मच्छर आते थे। ऐसा कह कर गाय को न चारा खिलाते हैं और उनकी हिफाजत भी सही तरीके से नहीं करते थे। खुला छुट्टर मवेशियों को छोड़ने की वजह से रोड पर तथा किसी के खेत खलिहान इत्यादि जगह पर मवेशियों का भंडार दिखता था। जो लोगों के लिए बहुत ही परेशानी का कारण बन जाता है।

वैसे तो गांव-गांव सरकार लगभग 25 वर्षों से बायोगैस संयंत्र लगाने हेतु प्रोत्साहन छूट सब्सिडी इत्यादि का प्रावधान रखती हैं। गोधन को और गोवर्धन को ऊर्जा में बदलने के लिए बहुत प्रयास किए किंतु गलत तरीके से बनने वाले बायोगैस की टंकियां या डोम से किसानों को बहुत ज्यादा फायदा नहीं हुआ । अलाली के कारण भी किसान इस गोबर गैस के महत्वपूर्ण घटक मिथेन को ऊर्जा के रूप में दोहन नहीं कर सके ।नतीजा वही हुआ कि" गाय हमारी माता है हमको कुछ नहीं आता है "के स्लोगन को पूरा करते हुए इतने महत्वपूर्ण घटक गोबर को किसान लगभग भूलता ही चला गया ।

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इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा एक अनोखी पहल करते हुए गोधन को गोबर में किसानों और पशुपालकों से खरीदने के लिए ₹2 प्रति किलो का ऑफर किया गया ।जिसके कारण सभी किसान और पशुपालक लाभान्वित हुए हैं। वर्मी कंपोस्ट बनाने वाले केंचुआ पद्धति से इस गोबर को सुखा कर इनकी गैस को उड़ा देते हैं और फिर उसके बाद हल्के कच्चे गोबर को केचूओं को खाने के लिए देते हैं। जिससे वह अच्छी क्वालिटी का वर्मी कंपोस्ट बनाकर जमीन को वापस लौटा देते हैं ।इस बायोडिग्रेडेबलटी के कारण पर्यावरण भी तंदुरुस्त रहता है और जैविक खेती का लाभ भी सभी - मानव समुदाय को मिलता है। यही असली गोवर्धन है जो ज्ञान के साथ-साथ धन की वृद्धि भी करता है।



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