ग्लिसरीन सबसे बेहतरीन ....

ग्लिसरीन सबसे बेहतरीन ....
Weeping leaders

t4unews:- जब दर्द नहीं था सीने में तब खाक मजा था जीने में... और रोते हुए आते हैं सब हंसता हुआ जो जाएगा ...

वही अभिनेता से नेता कहलाएगा।
जब बात लिखने से नहीं ,बोलने से पूरा हो जाए और बोलने से नहीं एक वीडियो से पूरा हो जाए ,और वीडियो नहीं एक एक्शन यानी एक्टिंग से पूरी हो जाए और एक एक्टिंग नहीं एक आंसू से पूरी हो जाए तो अभिव्यक्ति कितनी आसान हो जाती है। कहने को तो मर्द को दर्द नहीं होता पर अंदर से जो घुटन होती है वह आंखों के माध्यम से जज्बात के माध्यम से जब बाहर आ जाए तभी आदमी सामान्य हो पाता है वरना कुंठा से ग्रसित रहता है। इसलिए मनोवैज्ञानिक भी जो विक्षिप्त हो जाते हैं या जो किंकर्तव्यविमूढ़ से हालत में रहते हैं बेआवाज रहते हैं उन्हें रोने रुलानें के लिए जोर देते हैं कि किसी तरीके से उन्हें रुलाया जाए और उसके गम को बाहर निकाला जाए। जैसे यदि किसी मां का बच्चा जन्म लेते ही मर जाए या कोख में ही मर जाए तो उसके दुख को मां बयां नहीं कर पाती और बेआवाज सी रहती है ऐसे समय उसे कुछ न कुछ कारण बताकर या कोई और तरीके से रुलाया जाता है ताकि अपने दिमाग मैं बसे हुए गम को आंसुओं के माध्यम से बाहर  निकालकर स्वयं को हल्का कर सकें। यह एक दिव्य अस्त्र है और कभी कभी पहाड़ियों में ग्लेशियर और हिमखंड से जुड़े हुए समूह  के पिघल कर नीचे आने से  एक सैलाब उठता है। सारी बाधाओं और सीमाओं को तोड़ते हुए मैदान में आ जाता है इसी प्रकार कुदरत के द्वारा यह  शक्ति और पीड़ित व्यक्ति के दिलो दिमाग से होते हुए दरिया सैलाब बन कर  नदी की धार बनकर जब बहता है तो मैदान रूपी कपोलों से होते हुए पूरे दुनिया में छा जाता है।

जिसका लाभ यदि सही समय पर उठाया जाए तो सबको भावुक करता है ,प्रेरित करता है और किसी प्रकार से उद्वेलित करता है कि इन आंसुओं की कीमत क्या हो सकती है ? यदि कोई अबला आंसू बहाती है तो जितने सबल लोग हैं वह उद्वेलित हो जाते हैं और उसकी सुनने के लिए इकट्ठे होने लगते हैं। इसी प्रकार कोई निरीह प्राणी के आंखों से जब आंसू निकालता है तो उसके रक्षक उसकी सहायता के लिए खड़े हो जाते हैं आज हम जिन कर्णधारों और नेताओं को अपना रक्षक मान रहे हैं वही अबला और निरीह प्राणियों की तरह जब आंसुओं के माध्यम से यह प्रदर्शित करना चाह रहे हैं कि वह बहुत भावुक हैं ।उनसे अब इसके बाद कुछ नहीं बन सकता ।वह इस क्षेत्र में केवल लाचार है। परमपिता परमेश्वर की शरण में है और पूरे अपने समुदाय तथा अन्यों को आंसुओं से प्रेरित कर रहे हैं। तब समझ में आता है कि अब यह अभिव्यक्ति का  एक अच्छा सशक्त माध्यम बन चुका है। सभी प्रकार के नेतृत्व क्षमता के धनी नेता एक अच्छे अभिनेता अभिनेता हुआ करते हैं ।एक अच्छा अभिनेता ही समय-समय पर अपनी भावनाओं  को उजागर कर सकता है ।नाट्य संस्थानों द्वारा इस प्रकार की कलाओं को उजागर करने के लिए ग्लिसरीन नाम के पदार्थ का उपयोग करना सिखाती है जो अनायास अचानक एक्शन कहते हैं उस चीज को प्रदर्शित कर सके। जो जन समुदाय के सम्मुख हो रहा हो। अगर इस चीज का प्रयोग बखूबी लोग कर लेते हैं तो उसमें सफलता उनके हाथ में लगती है क्योंकि यह जाना जाता है कि आंसुओं और मां के स्तन से उतरने वाले दूध का संबंध मनो मस्तिष्क से होता है। जैसे गाय और अनेक प्रकार की माताओं में स्तनपान कराने के लिए ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन को लगाकर के इंजेक्शन का प्रभाव के द्वारा स्तन में दूध का संचरण किया जाता है ठीक उसी प्रकार आंखों में ग्लिसरीन का उपयोग करने से भी इस कार्य में सफलता मिल सकती है। हमारे कुछ नौसिखिया कम जानकार नेताओं को इस बात का अच्छे से जानकारी होना चाहिए कि ग्लिसरीन नाम के पदार्थ को अब हमेशा जेब में अस्त्र की तरह रखें ।यूं तो प्रशासन उपद्रवियों और  प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ेती  हैं परंतु स्वयं व्यक्तिगत तौर पर अपने स्वयं के आंसू के लिए ,धोखा देने के लिए या अपने भावनाओं को उजागर करने के लिए इमोशनल करने के लिए यदि आप अपनी आंखों से अश्रु की धारा प्रवाहित करना चाहते हैं तो उसके लिए ग्लिसरीन सबसे बेहतरीन है।



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