इंजीनियर डॉक्टर श्री अशोक तिवारी की नजर से व्यंग कार हरिशंकर परसाई का चरित्र चित्रण

डॉ अशोक कुमार तिवारी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर होने के साथ-साथ एक सफल ब्लॉगर भी हैं जिन्होंने भारत के भूले बिसरे नायकों ,धर्म और दर्शन साइंस और टेक्नोलॉजी पर अनेक लेख अपने ब्लॉग में लिखे हैं। जिन का अध्ययन हम और आप इनके ब्लॉग में जाकर देख सकते हैं।

t4unews:इंजीनियर डॉक्टर श्री अशोक तिवारी की नजर से व्यंग कार 

इंजीनियर की कलम से साहित्य का सृजन भी बखूबी हो सकता है। ऐसी विभूतियों को फुर्सत के क्षणों में है पढ़ना और जानना भी एक आश्चर्य हो सकता है ।

डॉ अशोक कुमार तिवारी द्वारा संकलित श्री हरिशंकर परसाई व्यंग कार के संबंध में नई पीढ़ी को अवगत कराना उनका समाजिक कर्तव्य हो सकता है। साहित्य में एक से बढ़कर एक क्षणिकाएं ,रोचक लेख और अभिव्यक्तियां पढ़ने, सुनने ,देखने मिलती रहती है परंतु एक विद्वान की नजर से दूसरे विद्वान को देखने जानने का ढंग भी अपने आप में अनोखा होता है ।आइए आज हम देखते हैं अशोक कुमार तिवारी जिनकी योग्यता अर्जित की गई सभी प्रकार की डिग्रियां को भी हम जाने, जिन्होंने डॉ हरिशंकर परसाई के ऊपर अपना अनुभव अपने ब्लॉग के द्वारा दिया है ।आज इस पर हम अपनी विवेचना करेंगे।

डॉ अशोक कुमार तिवारी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर होने के साथ-साथ एक सफल ब्लॉगर भी हैं जिन्होंने भारत के भूले बिसरे नायकों ,धर्म और दर्शन साइंस और टेक्नोलॉजी पर अनेक लेख अपने ब्लॉग में लिखे हैं। जिन का अध्ययन हम और आप इनके ब्लॉग में जाकर देख सकते हैं।

https://youtu.be/3Egnep18ofs

डॉक्टर तिवारी आगे लिखते हैं कि

परसाई जी का घर

लगभग 37 साल पहले मैं इस घर मे परसाई जी से मिला था । 

तब मैं बी. ई. तृतीय वर्ष का छात्र था । जबलपुर इंजीनियरिंग कालेज के प्रोफेसर दिनेश खरे (सिविल) कालेज में साहित्यिक कार्यक्रमों के इंचार्ज थे और हमारे एक सीनियर समीर निगम "सारिका कहानी मंच" के संयोजक थे । उनके साथ मुझे परसाई जी के घर जाने का अवसर मिला । परसाई जी को सभी साहित्यकार दादा कहते थे और रामेश्वर अंचल जी को दद्दा । उनका सिगरेट पीते रहना , बिंदास स्वभाव और ठहाके लगा कर बोलना आज भी याद है। हरिशंकर परसाई एक सरल और सहज व्यक्तित्व थे, उनका स्वाभाव मजाकिया था । फक्कड़ की तरह रहते थे । 

यहां हम आगे बताते हैं कि अक्सर महान विभूतियां यह जानती है कि एक ना एक दिन सबको जाना है इसलिए वह अपने जीवन को बहुत ज्यादा मैं मेरा मेरा परिवार मेरे आगे का भविष्य आदि पर नहीं सोचते हुए फक्कड़ जीवन जीना पसंद करते हैं।

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ब्लॉग में आगे डॉ अशोक कुमार तिवारी जी लिखते हैं की

देश के जागरुक प्रहरी के रूप में पहचाने जाने वाले हरिशंकर परसाई जी ने लेखन में व्यंग्य की विधा को चुना, क्योंकि वे जानते थे कि समसामयिक जीवन की व्याख्या, उनका विश्लेषण और उनकी भर्त्सना एवं विडम्बना के लिए व्यंग्य से बड़ा कारगर हथियार और दूसरा हो नहीं सकता । उनकी अधिकतर रचनाएं सामाजिक राजनीति, साहित्य, भ्रष्टाचार, आजादी के बाद का ढोंग, आज के जीवन का अन्तर्विरोध, पाखंड और विसंगतियों पर आधारित है । उनके लेखन का तरीका मात्र हंसाता नहीं वरन् आपको सोचने को बाध्य कर देता है। 

परसाई जी ने सामाजिक और राजनीतिक यथार्थ की जितनी समझ पैदा की उतना हमारे युग में प्रेमचंद के बाद कोई और लेखक नहीं कर सका है । 

आज लगभग 37 वर्ष बाद किसी कार्यवश उस तरफ जाना हुआ तो सोचा चलो परसाई जी का घर भी देख ले । 

अब वहां पर कम्युनिस्ट पार्टी का कार्यालय है । परसाई जी की स्मृति कही नजर नही आई ।

हरिशंकर परसाई जी व्यंग्य लेखक को डॉक्टर की जगह रखते थे. जैसे डॉक्टर पस को बाहर निकालने के लिए दबाता है. वैसे व्यंग्य लेखक समाज की गंदगी हटाने के लिए उस पर उंगली रखता है. उसमें वो कितने कामयाब हुई ये बताना नापने वालों का काम है. हमारा तुम्हारा काम है उनको और पढ़ना.

इस जीवन में किसी प्रकार की कलाकृति या आश्चर्य बनने वाले धरोहर को बनाने का तात्पर्य केवल इतना नहीं होता कि यही अंत है अपितु यह सृजन कार और विश्लेषकों को सोचने के लिए आमादा करता है कि हमने आपको शून्य तक पहुंचा दिया है अब इसके आगे आप गिनती बढ़ा सकते हैं। अगर आप में क्षमता है तो अपने ज्ञान के तार की और विश्लेषक बुद्धि से आगे की व्याख्या आप करें ।जिसको अन्य लोग सुने और देखें ।इसी प्रयास में थिंक फॉर यूनिटी न्यूज़  के द्वारा डॉ अशोक कुमार तिवारी के द्वारा लिखित इस ब्लॉग को हमने अपने ज्ञान चक्षु से देखने की चेष्टा की है श्री हरिशंकर परसाई हवा के झोका है जिनमें जिन्हें किसी स्मृति या अवशेष से जाना पहचाना नहीं जा सकता ।उनके लिखे गए व्यंग टॉर्च बेजने वाला जो हम माध्यमिक शिक्षा मंडल के द्वारा स्कूल के दिए गए साहित्य में 80 और 90 के दशक में पढ़ने के लिए कोर्स में समझे और जाने थे, आज भी प्रासंगिक हैं ।जो व्यापारिक और राजनीतिक बुद्धिजीवियों के लिए अनुकरणीय हैं और समाज के अन्य लोगों को समझने के लिए पर्याप्त है कि कैसे इस जीवन में सफल होने के लिए अपनी वस्तु को दूसरों तक प्रचारित प्रसारित करने के लिए उन्हें डराते और भयभीत करते है क्योंकि भय बिन होय न प्रीत।

मनुष्य अपने छोटे से जीवन में चाहे तो बहुत कुछ कर सकता है इस बात को चरितार्थ करते हुए डॉ अशोक कुमार तिवारी जी ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक होने के बाद पावर सिस्टम और ऑटोमेशन में अपनी मास्टर डिग्री प्राप्त किया है। उसके बाद एमबीए ,एमएसडब्ल्यू, पीएचडी इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में किया है। डी.एससी ऑनर्स और माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड प्रोफेशनल होने के साथ-साथ सर्टिफाइड एनर्जी ऑडिटर भी हैं तथा इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर लाइसेंस के साथ हुआ अपनी सेवाएं संपत्ति मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड पूर्वी क्षेत्र में दे रहे हैं ।इनकी साहित्यिक और अन्य सामाजिक सेवा गतिविधियों के कारण भी इनकी चाहने वाले लोग इन्हें बहुत आदर से देखते हैं।

आगे की  उनकी रचनाओं की पढ़ाई जारी रखने हेतु  डॉक्टर अशोक तिवारी के ब्लॉग पर नीचे दिए लिंक को क्लिक करें।

http://drashoktiwari.blogspot.com/2023/05/blog-post_30.html?m=1


 

drashoktiwari

Dr. ASHOK KUMAR TIWARI, B.E. (Electrical Engineering), M.Tech. (Power System Automation), M.B.A., M.S.W., Ph.D. in Energy Management, D.Sc.(Hon) , Microsoft Certified Professional, Project Management Certified Professional, Certified Energy Auditor – Govt. of India, International Electrical Competency Certificate, Electrical Supervisory Licence- Govt. of M.P. , his e-mail address- [email protected]



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