अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ अब सोलर पैनल भी लगवाए

हमने देखा है लॉकडाउन जैसे भीषण समय में जब लोगों को घर से बाहर निकलने की मनाही थी उस समय लोगों का घर यदि वातानुकूलित नहीं होता तो क्या हश्र होता ? छोटे-छोटे घरों में रहने वाले लोगों का जहां गर्मी के मारे और बिना हवा बिना पानी के क्या हाल होता? ऐसे समय विद्युत कंपनियों की लाइनों ने जिस प्रकार सुचारू ढंग से लोगों को बिजली की आपूर्ति की थी वे सभी साधुवाद के पात्र हैं ।

अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ अब सोलर पैनल भी लगवाए
सोलर पावर लगाएं पढ़ाई के साथ-साथ

t4unews:-हम अपने बच्चों को अच्छी तालीम और अच्छा हुनर देने के लिए कटिबद्ध रहते हैं क्योंकि जानते हैं कि बच्चों की शिक्षा और हुनर पर किया गया निवेश हमें चिंता मुक्त करता है भविष्य के लिए क्योंकि हम किसी भी प्रकार की प्रॉपर्टी या संचय करते हैं वह तो समय के साथ जितना बढ़ता है उससे कहीं ज्यादा, 10 गुना ,20 गुना ,50 गुना रफ्तार से वह राशि बढ़ती है जो किसी एक बच्चे को शिक्षित और हुनरमंद बनाने मैं करते हैं, क्योंकि वह अपने जीवन में इतना कुछ खा कमा लेता है कि जो गणना से परे हैं । लेकिन अब यह कहावत कुछ गलत हो रही है। आज का हमारा शिक्षा प्रणाली इतनी खर्चीली और इतनी मुश्किल हो गई है कि जिसको 15 साल तक लगातार पढ़ने के बाद ही ग्रेजुएट बच्चों का कोई भी भविष्य वर्तमान में नजर नहीं आ रहा है ।1980 के दौर में जन्मे को सभी बच्चे अब लगभग 30 वर्ष की उम्र को क्रॉस करने वाले हैं परंतु अभी तक उनके पास कोई भी स्थाई तो नौकरी या ऐसा कोई पैसा उन्हें नहीं मिल पाया है जिनसे वह अपने आगे के 50 या 60 वर्ष का जीवन सही संतुलित ढंग से व्यतीत कर सकें ।आज भी अभिभावक उनके भविष्य को लेकर चिंतित हैं इसलिए देर से शादी होने की जैसी विडंबना इस समाज में  बहुधा व्याप्त है ।इस संबंध में हम आपका ध्यान आकर्षण करना चाहेंगे कि जिस प्रकार कबीर दास ने कहा है याते तो चाकी भली पीस खाए संसार, पत्थरों को पूजने से क्या मिलता है केवल एक संतुष्टि जबकि उसके बजाय उस पत्थर की बनी हुई चक्की जो लोगों के पेट के भरण-पोषण का कार्य करती है। ऐसी पाषाण की प्रतिमा जो लोगों की रोजी रोटी और जीवन से जुड़ी हो वह पत्थरों की बनाई गई मूर्ति से लाख गुना श्रेयस्कर पत्थर की चक्की होती है ।उसी के समान हम जिस प्रकार बच्चों की तालीम शिक्षा और उन्हें हुनरमंद बनाने के लिए पूरे 15 वर्षों में जिस प्रकार एक बच्चों पर 40 से 50 लाख रुपए का खर्च कर डालते हैं ।उसके बाद भी सरकार की ओर से ना कोई बेरोजगारी या महंगाई भत्ता नहीं, कोई उनके कैरियर की बात और नहीं?

ऐसे उच्च शिक्षित बच्चे मेहनत मशक्कत के द्वारा काम करने लायक  भी नहीं रह जाते हैं। ऐसी शिक्षा प्रणाली और अनस्किल्ड बच्चों के नाम पर बेरोजगारी का बढ़ना इस देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। इससे अच्छा तो वह सोलर पैनल है जो कम से कम छत में एक बार लगा दिया जाए तो आने वाले 25 वर्षों तक आपको ऊर्जा के क्षेत्र में वह आत्मनिर्भर कर देगा और भारी-भरकम बिजली के आने वाले दिनों से छुटकारा तो प्रदान कर देगा। क्योंकि हमने देखा है लॉकडाउन जैसे भीषण समय में जब लोगों को घर से बाहर निकलने की मनाही थी उस समय लोगों का घर यदि वातानुकूलित नहीं होता तो क्या हश्र होता ? छोटे-छोटे घरों में रहने वाले लोगों का जहां गर्मी के मारे और बिना हवा बिना पानी के क्या हाल होता? ऐसे समय विद्युत कंपनियों की लाइनों ने जिस प्रकार सुचारू ढंग से लोगों को बिजली की आपूर्ति की थी वे सभी साधुवाद के पात्र हैं ।
पर आगे आने वाले भविष्य में अगर इस प्रकार बढ़ती हुई बिजली की दरों से किसी प्रकार का निजात या सुविधा मिल सके तो वह आपको आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला सोलर पैनल ही हो सकता है ।जो आपको सदैव ऊर्जावान रखेगा और साथ ही साथ आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सूर्य की प्रखर ऊर्जा फोटोन को आपके घर प्रदान करने के लिए हमेशा तत्पर रहेगा।



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