आदि पुरुष धड़ाम से गिर गई है और इसका ठीकरा मनोज मुंतशिर के सर पर आ पड़ा है।

t4unews:आदि पुरुष धड़ाम से गिर गई है और इसका ठीकरा मनोज मुंतशिर के सर पर आ पड़ा है।

Controversial dialogues of Adipurush

  1.  कपड़ा तेरे बाप का! तेल तेरे बाप का ! जलेगी भी तेरे बाप की 

  2. तेरी बुआ का बगीचा है क्या जो हवा खाने चला आया.

  3. जो हमारी बहनों को हाथ लगाएगा उनकी लंका लगा देंगे।

  4. आप अपने काल के लिए कालीन बिछा रहे हैं।

  5. मेरे एक सपोले ने तुम्हारे शेषनाग को लंबा कर दिया अभी तो पूरा पिटारा भरा पड़ा है।

तीर जो कमान से निकला और शब्द जो जबान से निकला 

यह बात मनोज मुंतशिर शुक्ला पर भी साबित हुई ।उनकी देश प्रेमी और सनातन धर्म के प्रति जुड़ाव लगाव और उसके संरक्षण के लिए किया जाने वाला कार्य उनके फैंस के द्वारा हासिए पर रख दिया गया ।जब अनाप-शनाप , उलजलुल, असमकालीन रामलीला कंपनी जैसे सड़क छाप, लोकल डायलॉग रखकर इस नए फिल्म आदिपुरुष का लोगों ने दर्शन किया ।तब समझ में आ गया कि यह आदि पुरुष नहीं यह आधा पुरुष की जैसा फिल्मी डायलॉग हो गया है ।

आखिर दुनिया आपकी एक गलती का इंतजार कर रही होती है ।

मनोज मुंतशिर शुक्ला से उनके फैंस को ऐसी उम्मीद नहीं थी जैसा उन्होंने प्रदर्शन किया है। ट्विटर पर मनोज मुंतशिर द्वारा काफी भावुक पोस्ट लिखकर ट्वीट भी किया है और समय रहते इस फिल्म के डायलॉग में संशोधन करने की बात भी बताई है ।परंतु विद्वान लोगों को यह बात पहले ही समझ जानी थी कि इस प्रकार के ऊलजलूल प्रयोग आपके धर्म प्रेम के लिए नहीं बल्कि आपके अधर्मिता को प्रदर्शित करेगा। आप सब अच्छा करो लेकिन एक गलती करोगे तो उसका अंजाम आपको भोगना ही पड़ेगा।

मनोज मुंतशिर शुक्ला अपने ट्वीट में लिखते हैं कि

रामकथा से पहला पाठ जो कोई सीख सकता है, वो है हर भावना का सम्मान करना.

सही या ग़लत, समय के अनुसार बदल जाता है, भावना रह जाती है.

आदिपुरुष में 4000 से भी ज़्यादा पंक्तियों के संवाद मैंने लिखे, 5 पंक्तियों पर कुछ भावनाएँ आहत हुईं.

उन सैकड़ों पंक्तियों में जहाँ श्री राम का यशगान किया, माँ सीता के सतीत्व का वर्णन किया, उनके लिए प्रशंसा भी मिलनी थी, जो पता नहीं क्यों मिली नहीं.

मेरे ही भाइयों ने मेरे लिये सोशल मीडिया पर अशोभनीय शब्द लिखे.

वही मेरे अपने, जिनकी पूज्य माताओं के लिए मैंने टीवी पर अनेकों बार कवितायें पढ़ीं, उन्होंने मेरी ही माँ को अभद्र शब्दों से संबोधित किया.

मैं सोचता रहा, मतभेद तो हो सकता है, लेकिन मेरे भाइयों में अचानक इतनी कड़वाहट कहाँ से आ गई कि वो श्री राम का दर्शन भूल गये जो हर माँ को अपनी माँ मानते थे.

शबरी के चरणों में ऐसे बैठे, जैसे कौशल्या के चरणों में बैठे हों.

हो सकता है, 3 घंटे की फ़िल्म में मैंने 3 मिनट कुछ आपकी कल्पना से अलग लिख दिया हो, लेकिन आपने मेरे मस्तक पर सनातन-द्रोही लिखने में इतनी जल्दबाज़ी क्यों की, मैं जान नहीं पाया.

क्या आपने ‘जय श्री राम’ गीत नहीं सुना, 

‘शिवोहम’ नहीं सुना, 

‘राम सिया राम’ नहीं सुना? 

आदिपुरुष में सनातन की ये स्तुतियाँ भी तो मेरी ही लेखनी से जन्मी हैं.

‘तेरी मिट्टी’ और ‘देश मेरे ’भी तो मैंने ही लिखा है.

मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है, आप मेरे अपने थे, हैं और रहेंगे.

हम एक दूसरे के विरुद्ध खड़े हो गये तो सनातन हार जायेगा.

हमने आदिपुरुष सनातन सेवा के लिए बनायी है, जो आप भारी संख्या में देख रहे हैं और मुझे विश्वास है आगे भी देखेंगे.

ये पोस्ट क्यों? 

क्योंकि मेरे लिये आपकी भावना से बढ़ के और कुछ नहीं है.

मैं अपने संवादों के पक्ष में अनगिनत तर्क दे सकता हूँ, लेकिन इस से आपकी पीड़ा कम नहीं होगी.

मैंने और फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक ने निर्णय लिया है, कि वो कुछ संवाद जो आपको आहत कर रहे हैं, 

हम उन्हें संशोधित करेंगे, और इसी सप्ताह वो फ़िल्म में शामिल किए जाएँगे. 

श्री राम आप सब पर कृपा करें!

अब डैमेज कंट्रोल करने के लिए यदि इस प्रकार के सुधारे बनाए गए नए डायलॉग फिल्म में डाले गए तो शायद हो सकता है फिल्म को दोबारा देखने करने के लिए लोग और खर्च करें और फिल्म की आय में वृद्धि हो सके। यह भी एक मार्केटिंग का जरिया हो सकता है क्योंकि इतने संभ्रांत, समझदार और बुद्धिजीवी लोगों से इस प्रकार के कुछ एक्स्ट्रा करने की उम्मीद तो शायद ही किसी मूर्खों को समझ में ना आए।

#Adipurush #JaiShreeRam

आदि पुरुष धड़ाम से गिर गई है और इसका ठीकरा मनोज मुंतशिर के सर पर आ पड़ा है।
Manoj muntsir

1. फिल्म निर्माता के द्वारा जानबूझकर ऐसा कंट्रोवर्सी पैदा किया गया है ताकि फिल्म हिट हो जाए?

मनोज मुंतशिर शुक्ला जैसे विद्वान लेखक और सेंसर बोर्ड की सम्मानित सदस्यों की नजर से इतनी बड़ी चूक हो गई गई पौराणिक काल की कथाओं में संस्कृत और शुद्ध हिंदी का समावेश जहां होता था वहां हलकट और चारों शब्दावली का प्रयोग किया गया है यह घोर आश्चर्य का विषय है।

फिल्म निर्माता के द्वारा जानबूझकर ऐसा कंट्रोवर्सी पैदा किया गया है ताकि फिल्म हिट हो जाए?
निसंदेह इस बात में सत्यता है कि जानबूझकर कंट्रोवर्सी की गई है।
यह एक भूल हो सकती है जिसका प्रायश्चित हेतु दोबारा डायलॉग लेखन किया जाने का ढोंग किया जा रहा है।


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